इस हफ्ते में सूरज की तपिश ने लोगों को अपनी गर्मी से परेशां कर रखा है ... जब सूरज मजबूत होता है तोह धरती और हमारे आस की चीज़ों में एक निजता से आ जाती है ... आपका अपना शरीर पसीने से लदबद हो जाता है आपको एक irritation सी होने लगती है , जब आप मैनहट्टन के किसी गन्दी सड़क से गुजरते हैं तो underground नालें की बदबू आपकी नासिकायों का स्वागत करती है ... आज शाम मैं घुमने गया था .. सूरज की तपिश ने धरती को एक सौंधी सी खुसबू दी है सड़क के किनारें चलते चलते बगल के बगीचे से ऐसी ही सौंधी सुगंध ने मुझे अपने बस में कर लिया .. मन करता था उसे खूब जोर जोर से अपने बदन में महसूस करू .... शरीर तोः धरती की सुगंध को महसूस करने में डूबा था .. मन कहीं और चला गया था .. शायद अपने गाँव की तरफ जहाँ इतनी तपन तोः आम बात है .. और धरती की खुसबू , पसीने की बदबू .. नालियों की महक ... रोजाने के जीवन का हिस्सा है .... खैर में कहना तोः कुछ और चाहता था इस ब्लॉग में ... चलिए लिख ही देते हैं वोह दास्ताँ जोह मेरे जीवन का महत्वपूर्ण दिन था .....
४ जुलाई की बात है .. मैं अपने एक दोस्त के barbecue में आमंत्रित था ... सब कुछ ७ बजते बजते ख़तम सा हो गया था ... मेरे पास कैमरा था सोचा की शाम की सुनहली शमा को अपने कैमरा में कैद कर लूं ... campus पास ही था .. मोर्निंग साइड पार्क से चलते चलते अली से मुलाकात हो गयी.. करीब घंटें भर बातें करके .. अन्दर campus के तरफ आ गया ...कुछ तावीरें कैद की अपने कैमरे में .. फिर ११० स्ट्रीट से नंबर १ ट्रेन लेने के बदले चलता रहा.. चलता रहा .. वोही पुराने neighborhood जहाँ में कभी रहता था .. १०३ स्ट्रीट के अस पास के pinkberry से एक मांगो आइसक्रीम ख़रीदा .. चलते चलते .. एक पोस्टर पर नज़र पड़ी .. लिखा था माँ amritanandmai न्यू योर्क में दर्शन देने वाली है .. chattered mind को एक और ठिकाना.. सोचा की मौके मिला तोः इन्हें भी देख लेते हैं .. समय नोट कर लिया .. जुलाई ६ साथ बजे ...
काम ख़तम करके मनीष पहुँच गया ३११ manhattan प्लेस .. कहीं हज़ार लोग थे .. मुझे भी एक पिंक स्लिप मिला .. कुछ देर बैठने से पता चला की वोह दर्शन स्लिप है जब अन्दर आया था तोः एक अलग दुनिया दिखी ... संगीत .. दुकाने .. अम्मा के नाम एक बहुत बड़ा बिज़नस empire दिखा . साधारण से लोग दिखे जिन्हें मुक्ति की तलाश थी .. ऐसे भी दिखे जोह सिर्फ पार्टी करने आये थे ..
खैर वोह पिंक स्लिप एक खास था क्योंकि वोह .. अम्मा से व्यकिगत रूप से मिलने का मौका .... कुछ अनुभवी लोगों से पुछा,, तो पता चला की प-३ ( ये मेरे स्लिप का नंबर था ) का नंबर २ बजे के अaस पास आयेगा . Embracing the world ( यह अम्मा के humanitrian ओर्ग का नाम है ) कुछ volunteer दूंढ रहे थे ..मुझे भीगे हुए बर्तन सुखाने का काम मिला .. जाकोब जवित्ज़ सेण्टर में उनकी रसोई थी .. मुझे वहां वान से ले जाया गया .. १ बजते बजते में फिर से वापस आ गया था .. वोही अलग दुनिया में .. जहाँ अम्मा सबसे समन्यवय भाव से मिल रही थी ..
मेरा वक़्त ४.३० मिनट पर आया ... अम्मा ने मुझे गोद में भर लिया ..कानो में कुछ कहा ... मुझे ऐसा लगा की मेरे बरसों की तलाश पूरी हो गयी है .. यह तलाश तो एक मृग तृष्णा .. की तरह है .. सेक्रेट तो मेरे ही पास है .. गुरु तो उसकी याद दिला देते है .. अम्मा ने फिर से वोह लौ जलाई है .... गुरु तोह बहुत मुश्किल से मिलते है.. अम्मा मिली है .. काम तोह मुझे ही करना है ..जीवित शरीर गुरु तोह भाग्य से ही मिलता है ....आजतक विडियो.. TAPE , आवाज़ और शिष्यों के माध्यम से
गुरु से मिला हूँ .. गुरु BRAHMA ! गुरु विष्णु .. तस्मै श्री गुरु नम:
Wednesday, July 7, 2010
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